1-Balkand / Sarga 28
Shloka 14
Shloka
गम्यतामिति तानाह यथेष्टं रघुनन्दनः ।मानसाः कार्यकालेषु साहाय्यं मे करिष्यथ ॥१-२८-१४॥
Sarga 28 / Shloka 14 Balkand