1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 27 / Shloka 8 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 27
Shloka 8

Balkand

77 Sarga
28 Shloka
1/27/8
1-Balkand / Sarga 27 Shloka 8
Shloka
प्रदीप्ते नरशार्दूल प्रयच्छामि नृपात्मज ।
धर्मपाशमहं राम कालपाशं तथैव च ॥१-२७-८॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘ककुत्स्थकुलभूषण! इनके सिवा दो अत्यन्त उज्ज्वल और सुन्दर गदाएँ, जिनके नाम मोदकी और शिखरी हैं, मैं तुम्हें अर्पण करता हूँ। पुरुषसिंह राजकुमार राम! धर्मपाश, कालपाश और वरुणपाश भी बड़े उत्तम अस्त्र हैं। इन्हें भी आज तुम्हें अर्पित करता हूँ॥ ७-८॥