1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 27 / Shloka 24 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 27
Shloka 24

Balkand

77 Sarga
28 Shloka
1/27/24
1-Balkand / Sarga 27 Shloka 24
Shloka
जपतस्तु मुनेस्तस्य विश्वामित्रस्य धीमतः ।
उपतस्थुर्महार्हाणि सर्वाण्यस्त्राणि राघवम् ॥१-२७-२४॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

बुद्धिमान् विश्वामित्रजीने ज्यों ही जप आरम्भ किया त्यों ही वे सभी परम पूज्य दिव्यास्त्र स्वत: आकर श्रीरघुनाथजीके पास उपस्थित हो गये और अत्यन्त हर्षमें भरकर उस समय श्रीरामचन्द्रजीसे हाथ जोड़कर कहने लगे—‘परम उदार रघुनन्दन! आपका कल्याण हो। हम सब आपके किङ्कर हैं। आप हमसे जो-जो सेवा लेना चाहेंगे, वह सब हम करनेको तैयार रहेंगे’॥ २४-२५॥