1-Balkand / Sarga 27
Shloka 22
Shloka
स्थितस्तु प्राङ्मुखो भूत्वा शुचिर्मुनिवरस्तदा ।ददौ रामाय सुप्रीतो मन्त्रग्राममनुत्तमम् ॥१-२७-२२॥
Sarga 27 / Shloka 22 Balkand