1-Balkand / Sarga 26
Shloka 34
Shloka
श्वः प्रभाते गमिष्यामस्तदाश्रमपदं मम ।विश्वामित्रवचः श्रुत्वा हृष्टो दशरथात्मजः ॥१-२६-३४॥
Sarga 26 / Shloka 34 Balkand