1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 26 / Shloka 3 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 26
Shloka 3

Balkand

77 Sarga
36 Shloka
1/26/3
1-Balkand / Sarga 26 Shloka 3
Shloka
अनुशिष्टोऽस्म्ययोध्यायां गुरुमध्ये महात्मना ।
पित्रा दशरथेनाहं नावज्ञेयं हि तद्वचः ॥१-२६-१३

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘भगवन्! अयोध्यामें मेरे पिता महामना महाराज दशरथने अन्य गुरुजनोंके बीच मुझे यह उपदेश दिया था कि ‘बेटा! तुम पिताके कहनेसे पिताके वचनोंका गौरव रखनेके लिये कुशिकनन्दन विश्वामित्रकी आज्ञाका नि:शङ्क होकर पालन करना। कभी भी उनकी बातकी अवहेलना न करना’॥