1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 26 / Shloka 25 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 26
Shloka 25

Balkand

77 Sarga
36 Shloka
1/26/25
1-Balkand / Sarga 26 Shloka 25
Shloka
अभिदुद्राव काकुत्स्थं लक्ष्मणं च विनेषुदी ।
तामापतन्तीं वेगेन विक्रान्तामशनीमिव ॥१-२६-२५॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उनके बाण-समूहसे घिर जानेपर मायाबलसे युक्त वह यक्षिणी जोर-जोरसे गर्जना करती हुई श्रीराम और लक्ष्मणके ऊपर टूट पड़ी। उसे चलाये हुए इन्द्रके वज्रकी भाँति वेगसे आती देख श्रीरामने एक बाण मारकर उसकी छाती चीर डाली। तब ताटका पृथ्वीपर गिरी और मर गयी॥२४-२५॥