1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 26 / Shloka 24 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 26
Shloka 24

Balkand

77 Sarga
36 Shloka
1/26/24
1-Balkand / Sarga 26 Shloka 24
Shloka
दर्शयञ्शब्दवेधित्वं तां रुरोध स सायकैः ।
सा रुद्धा बाणजालेन मायाबलसमन्विता ॥१-२६-२४॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

उनके बाण-समूहसे घिर जानेपर मायाबलसे युक्त वह यक्षिणी जोर-जोरसे गर्जना करती हुई श्रीराम और लक्ष्मणके ऊपर टूट पड़ी। उसे चलाये हुए इन्द्रके वज्रकी भाँति वेगसे आती देख श्रीरामने एक बाण मारकर उसकी छाती चीर डाली। तब ताटका पृथ्वीपर गिरी और मर गयी॥२४-२५॥