1-Balkand / Sarga 26
Shloka 14
Shloka
विश्वामित्रस्तु ब्रह्मर्षिर्हुंकारेणाभिभर्त्स्य ताम् ।स्वस्ति राघवयोरस्तु जयं चैवाभ्यभाषत ॥१-२६-१४॥
Sarga 26 / Shloka 14 Balkand