1-Balkand / Sarga 25
Shloka 8
Shloka
तां तु बालां विवर्धन्तीं रूपयौवनशालिनीम् ।जम्भपुत्राय सुन्दाय ददौ भार्यां यशस्विनीम् ॥१-२५-८॥
Sarga 25 / Shloka 8 Balkand