1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 25 / Shloka 4 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 25
Shloka 4

Balkand

77 Sarga
22 Shloka
1/25/4
1-Balkand / Sarga 25 Shloka 4
Shloka
विश्वामित्रोऽब्रवीद् वाक्यं शृणु येन बलोत्कटा ।
वरदानकृतं वीर्यं धारयत्यबला बलम् ॥१-२५-४॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

अमित तेजस्वी श्रीरघुनाथके कहे हुए इस वचनको सुनकर विश्वामित्रजी अपनी मधुर वाणीद्वारा लक्ष्मणसहित शत्रुदमन श्रीरामको हर्ष प्रदान करते हुए बोले—‘रघुनन्दन! जिस कारणसे ताटका अधिक बलशालिनी हो गयी है, वह बताता हूँ, सुनो। उसमें वरदानजनित बलका उदय हुआ है; अत: वह अबला होकर भी बल धारण करती है (सबला हो गयी है)॥ ३-४॥