1-Balkand / Sarga 25
Shloka 4
Shloka
विश्वामित्रोऽब्रवीद् वाक्यं शृणु येन बलोत्कटा ।वरदानकृतं वीर्यं धारयत्यबला बलम् ॥१-२५-४॥
Sarga 25 / Shloka 4 Balkand