1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 24 / Shloka 32 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 24
Shloka 32

Balkand

77 Sarga
32 Shloka
1/24/32
1-Balkand / Sarga 24 Shloka 32
Shloka
यक्षिण्या घोरया राम उत्सादितमसह्यया ।
एतत्ते सर्वमाख्यातं यथैतद् दारुणं वनम् ।
यक्ष्या चोत्सादितं सर्वमद्यापि न निवर्तते ॥१-२४-३२॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘राम! उस असह्य एवं भयानक यक्षिणीने इस देशको उजाड़ कर डाला है। यह वन ऐसा भयङ्कर क्यों है, यह सारा रहस्य मैंने तुम्हें बता दिया। उस यक्षिणीने ही इस सारे देशको उजाड़ दिया है और वह आज भी अपने उस क्रूर कर्मसे निवृत्त नहीं हुई है’॥ ३२॥

Footnote

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें चौबीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ २४॥