1-Balkand / Sarga 24
Shloka 28
Shloka
राक्षसो भैरवाकारो नित्यं त्रासयते प्रजाः ।इमौ जनपदौ नित्यं विनाशयति राघव ॥१-२४-२८॥
Sarga 24 / Shloka 28 Balkand