1-Balkand / Sarga 24
Shloka 17
Shloka
श्रूयतां वत्स काकुत्स्थ यस्यैतद् दारुणं वनम् ।एतौ जनपदौ स्फीतौ पूर्वमास्तां नरोत्तम ॥१-२४-१७॥
Sarga 24 / Shloka 17 Balkand