1-Balkand / Sarga 23
Shloka 5
Shloka
तौ प्रयान्तौ महावीर्यौ दिव्यां त्रिपथगां नदीम् ।ददृशाते ततस्तत्र सरय्वाः संगमे शुभे ॥१-२३-५॥
Sarga 23 / Shloka 5 Balkand