1-Balkand / Sarga 23
Shloka 21
Shloka
यथार्हमजपन् संध्यामृषयस्ते समाहिताः ।तत्र वासिभिरानीता मुनिभिः सुव्रतैः सह ॥१-२३-२१॥
Sarga 23 / Shloka 21 Balkand