1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 23 / Shloka 18 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 23
Shloka 18

Balkand

77 Sarga
22 Shloka
1/23/18
1-Balkand / Sarga 23 Shloka 18
Shloka
स्नाताश्च कृतजप्याश्च हुतहव्या नरोत्तम ।
तेषां संवदतां तत्र तपोदीर्घेण चक्षुषा ॥१-२३-१८॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

वे लोग वहाँ इस प्रकार आपसमें बातचीत कर ही रहे थे कि उस आश्रममें निवास करनेवाले मुनि तपस्याद्वारा प्राप्त हुई दूर दृष्टिसे उनका आगमन जानकर मन-ही-मन बड़े प्रसन्न हुए। उनके हृदयमें हर्षजनित उल्लास छा गया॥ १८॥