1-Balkand / Sarga 23
Shloka 14
Shloka
अनङ्ग इति विख्यातस्तदा प्रभृति राघव ।स चाङ्गविषयः श्रीमान् यत्राङ्गं स मुमोच ह ॥१-२३-१४॥
Sarga 23 / Shloka 14 Balkand