1-Balkand / Sarga 23
Shloka 12
Shloka
अवध्यातश्च रुद्रेण चक्षुषा रघुनन्दन ।व्यशीर्यन्त शरीरात् स्वात् सर्वगात्राणि दुर्मतेः ॥१-२३-१२॥
Sarga 23 / Shloka 12 Balkand