1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 23 / Shloka 10 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 23
Shloka 10

Balkand

77 Sarga
22 Shloka
1/23/10
1-Balkand / Sarga 23 Shloka 10
Shloka
कन्दर्पो मूर्तिमानासीत्काम इत्युच्यते बुधैः ।
तपस्यन्तमिह स्थाणुं नियमेन समाहितम् ॥१-२३-१०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘विद्वान् पुरुष जिसे काम कहते हैं, वह कन्दर्प पूर्वकालमें मूर्तिमान् था—शरीर धारण करके विचरता था। उन दिनों भगवान् स्थाणु (शिव) इसी आश्रममें चित्तको एकाग्र करके नियमपूर्वक तपस्या करते थे॥ १०॥