1-Balkand / Sarga 22
Shloka 8
Shloka
अनुजग्मतुरक्षुद्रौ पितामहमिवाश्विनौ ।अनुयातौ श्रिया दीप्तौ शोभयेतावनिन्दितौ ॥१-२२-८॥
Sarga 22 / Shloka 8 Balkand