1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 22 / Shloka 20 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 22
Shloka 20

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/22/20
1-Balkand / Sarga 22 Shloka 20
Shloka
प्रदातुं तव काकुत्स्थ सदृशस्त्वं हि पार्थिव ।
कामं बहुगुणाः सर्वे त्वय्येते नात्र संशयः ॥१-२२-२०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘ककुत्स्थनन्दन! मैंने इन दोनोंको तुम्हें देनेका विचार किया है। राजकुमार! तुम्हीं इनके योग्य पात्र हो। यद्यपि तुममें इस विद्याको प्राप्त करने योग्य बहुत-से गुण हैं अथवा सभी उत्तम गुण विद्यमान हैं, इसमें संशय नहीं है तथापि मैंने तपोबलसे इनका अर्जन किया है। अत: मेरी तपस्यासे परिपूर्ण होकर ये तुम्हारे लिये बहुरूपिणी होंगी—अनेक प्रकारके फल प्रदान करेंगी’॥२०॥