1-Balkand / Sarga 22
Shloka 2
Shloka
कृतस्वस्त्ययनं मात्रा पित्रा दशरथेन च ।पुरोधसा वसिष्ठेन मङ्गलैरभिमन्त्रितम् ॥१-२२-२॥
Sarga 22 / Shloka 2 Balkand