1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 22 / Shloka 13 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 22
Shloka 13

Balkand

77 Sarga
24 Shloka
1/22/13
1-Balkand / Sarga 22 Shloka 13
Shloka
मन्त्रग्रामं गृहाण त्वं बलामतिबलां तथा ।
न श्रमो न ज्वरो वा ते न रूपस्य विपर्ययः ॥१-२२-१३॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘बला और अतिबला नामसे प्रसिद्ध इस मन्त्र- समुदायको ग्रहण करो। इसके प्रभावसे तुम्हें कभी श्रम (थकावट) का अनुभव नहीं होगा। ज्वर (रोग या चिन्ताजनित कष्ट) नहीं होगा। तुम्हारे रूपमें किसी प्रकारका विकार या उलट-फेर नहीं होने पायेगा॥ १३॥