1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 20 / Shloka 15 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 20
Shloka 15

Balkand

77 Sarga
28 Shloka
1/20/15
1-Balkand / Sarga 20 Shloka 15
Shloka
स्थातव्यं दुष्टभावानां वीर्योत्सिक्ता हि राक्षसाः ।
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा विश्वामित्रोऽभ्यभाषत ॥१-२०-१५॥

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1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

राजा दशरथकी इस बातको सुनकर विश्वामित्रजी बोले—‘महाराज! रावण नामसे प्रसिद्ध एक राक्षस है, जो महर्षि पुलस्त्यके कुलमें उत्पन्न हुआ है। उसे ब्रह्माजीसे मुँहमाँगा वरदान प्राप्त हुआ है; जिससे महान् बलशाली और महापराक्रमी होकर बहुसंख्यक राक्षसोंसे घिरा हुआ वह निशाचर तीनों लोकोंके निवासियोंको अत्यन्त कष्ट दे रहा है। सुना जाता है कि राक्षसराज रावण विश्रवा मुनिका औरस पुत्र तथा साक्षात् कुबेरका भाई है॥