1-Balkand / Sarga 2
Shloka 4
Shloka
स तु तीरं समासाद्य तमसाया मुनिस्तदा ।शिष्यमाह स्थितं पार्श्वे दृष्ट्वा तीर्थमकर्दमम् ॥१-२-४॥
Sarga 2 / Shloka 4 Balkand