1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 2 / Shloka 30 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 2
Shloka 30

Balkand

77 Sarga
43 Shloka
1/2/30
1-Balkand / Sarga 2 Shloka 30
Shloka
पुनरन्तर्गतमना भूत्वा शोकपरायणः ।
तमुवाच ततो ब्रह्मा प्रहसन् मुनिपुङ्गवम् ॥१-२-३०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

ब्रह्माजी उनकी मन:स्थितिको समझकर हँसने लगे और मुनिवर वाल्मीकिसे इस प्रकार बोले—‘ब्रह्मन्! तुम्हारे मुँहसे निकला हुआ यह छन्दोबद्ध वाक्य श्लोकरूप ही होगा। इस विषयमें तुम्हें कोई अन्यथा विचार नहीं करना चाहिये। मेरे संकल्प अथवा प्रेरणासे ही तुम्हारे मुँहसे ऐसी वाणी निकली है॥ ३०-३१॥