1-Balkand / Sarga 2
Shloka 28
Shloka
तद्गतेनैव मनसा वाल्मीकिर्ध्यानमास्थितः ।पापात्मना कृतं कष्टं वैरग्रहणबुद्धिना ।॥१-२-२८॥
Sarga 2 / Shloka 28 Balkand