1-Balkand / Sarga 2
Shloka 21
Shloka
भरद्वाजस्ततः शिष्यो विनीतः श्रुतवान् गुरोः ।कलशं पूर्णमादाय पृष्ठतोऽनुजगाम ह ॥१-२-२१॥
Sarga 2 / Shloka 21 Balkand