1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 2 / Shloka 18 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 2
Shloka 18

Balkand

77 Sarga
43 Shloka
1/2/18
1-Balkand / Sarga 2 Shloka 18
Shloka
पादबद्धोऽक्षरसमस्तन्त्रीलयसमन्वितः ।
शोकार्तस्य प्रवृत्तो मे श्लोको भवतु नान्यथा ॥१-२-१८॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘तात! शोकसे पीडि़त हुए मेरे मुखसे जो वाक्य निकल पड़ा है, यह चार चरणोंमें आबद्ध है। इसके प्रत्येक चरणमें बराबर-बराबर (यानी आठ-आठ) अक्षर हैं तथा इसे वीणाके लयपर गाया भी जा सकता है; अत: मेरा यह वचन श्लोकरूप (अर्थात् श्लोक नामक छन्दमें आबद्ध काव्यरूप या यश:स्वरूप) होना चाहिये, अन्यथा नहीं’॥