1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 19 / Shloka 22 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 19
Shloka 22

Balkand

77 Sarga
22 Shloka
1/19/22
1-Balkand / Sarga 19 Shloka 22
Shloka
इति हृदयमनोविदारणं
मुनिवचनं तदतीव शुश्रुवान् ।
नरपतिरभवन्महान् महात्मा
व्यथितमनाः प्रचचाल चासनात् ॥१-१९-२२॥

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1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

थोड़ी देर बाद जब उन्हें होश हुआ, तब वे भयभीत हो विषाद करने लगे। विश्वामित्र मुनिका वचन राजाके हृदय और मनको विदीर्ण करनेवाला था। उसे सुनकर उनके मनमें बड़ी व्यथा हुई। वे महामनस्वी महाराज अपने आसनसे विचलित हो मूर्च्छित हो गये॥

Footnote

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें उन्नीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १९॥