1-Balkand / Sarga 19
Shloka 16
Shloka
स्थिरमिच्छसि राजेन्द्र रामं मे दातुमर्हसि ।यद्यभ्यनुज्ञां काकुत्स्थ ददते तव मन्त्रिणः ॥१-१९-१६॥
Sarga 19 / Shloka 16 Balkand