1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 18 / Shloka 58 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 18
Shloka 58

Balkand

77 Sarga
59 Shloka
1/18/58
1-Balkand / Sarga 18 Shloka 58
Shloka
कर्ता चाहमशेषेण दैवतं हि भवान् मम ।
मम च अयमनुप्राप्तो महानभ्युदयो द्विज ।
तवागमनजः कृत्स्नो धर्मश्चानुत्तमो द्विज ॥१-१८-५८॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘आप जो भी आज्ञा देंगे, मैं उसका पूर्णरूपसे पालन करूँगा; क्योंकि सम्माननीय अतिथि होनेके नाते आप मुझ गृहस्थके लिये देवता हैं। ब्रह्मन्! आज आपके आगमनसे मुझे सम्पूर्ण धर्मोंका उत्तम फल प्राप्त हो गया। यह मेरे महान् अभ्युदयका अवसर आया है’॥ ५८॥