1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 18 / Shloka 55 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 18
Shloka 55

Balkand

77 Sarga
59 Shloka
1/18/55
1-Balkand / Sarga 18 Shloka 55
Shloka
ब्रह्मर्षित्वमनुप्राप्तः पूज्योऽसि बहुधा मया ।
तदद्भुतमभूद् विप्र पवित्रं परमं मम ॥१-१८-५५॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

मेरी बीती हुई रात सुन्दर प्रभात दे गयी, जिससे मैंने आज आप ब्राह्मणशिरोमणिका दर्शन किया। पूर्वकालमें आप राजर्षि शब्दसे उपलक्षित होते थे, फिर तपस्यासे अपनी अद्भुत प्रभाको प्रकाशित करके आपने ब्रह्मर्षिका पद पाया; अत: आप राजर्षि और ब्रह्मर्षि दोनों ही रूपोंमें मेरे पूजनीय हैं। आपका जो यहाँ मेरे समक्ष शुभागमन हुआ है, यह परम पवित्र और अद्भुत है॥