1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 18 / Shloka 54 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 18
Shloka 54

Balkand

77 Sarga
59 Shloka
1/18/54
1-Balkand / Sarga 18 Shloka 54
Shloka
यस्माद् विप्रेन्द्रमद्राक्षं सुप्रभाता निशा मम ।
पूर्वं राजर्षिशब्देन तपसा द्योतितप्रभः ॥१-१८-५४॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

मेरी बीती हुई रात सुन्दर प्रभात दे गयी, जिससे मैंने आज आप ब्राह्मणशिरोमणिका दर्शन किया। पूर्वकालमें आप राजर्षि शब्दसे उपलक्षित होते थे, फिर तपस्यासे अपनी अद्भुत प्रभाको प्रकाशित करके आपने ब्रह्मर्षिका पद पाया; अत: आप राजर्षि और ब्रह्मर्षि दोनों ही रूपोंमें मेरे पूजनीय हैं। आपका जो यहाँ मेरे समक्ष शुभागमन हुआ है, यह परम पवित्र और अद्भुत है॥