1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 18 / Shloka 52 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 18
Shloka 52

Balkand

77 Sarga
59 Shloka
1/18/52
1-Balkand / Sarga 18 Shloka 52
Shloka
तथैवागमनं मन्ये स्वागतं ते महामुने ।
कं च ते परमं कामं करोमि किमु हर्षितः ॥१-१८-५२॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘महामुने! जैसे किसी मरणधर्मा मनुष्यको अमृतकी प्राप्ति हो जाय, निर्जल प्रदेशमें पानी बरस जाय, किसी संतानहीनको अपने अनुरूप पत्नीके गर्भसे पुत्र प्राप्त हो जाय, खोयी हुई निधि मिल जाय तथा किसी महान् उत्सवसे हर्षका उदय हो, उसी प्रकार आपका यहाँ शुभागमन हुआ है। ऐसा मैं मानता हूँ। आपका स्वागत है। आपके मनमें कौन-सी उत्तम कामना है, जिसको मैं हर्षके साथ पूर्ण करूँ? ५०—५२॥