1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 18 / Shloka 50 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 18
Shloka 50

Balkand

77 Sarga
59 Shloka
1/18/50
1-Balkand / Sarga 18 Shloka 50
Shloka
उवाच परमोदारो हृष्टस्तमभिपूजयन् ।
यथामृतस्य सम्प्राप्तिर्यथा वर्षमनूदके ॥१-१८-५०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

‘महामुने! जैसे किसी मरणधर्मा मनुष्यको अमृतकी प्राप्ति हो जाय, निर्जल प्रदेशमें पानी बरस जाय, किसी संतानहीनको अपने अनुरूप पत्नीके गर्भसे पुत्र प्राप्त हो जाय, खोयी हुई निधि मिल जाय तथा किसी महान् उत्सवसे हर्षका उदय हो, उसी प्रकार आपका यहाँ शुभागमन हुआ है। ऐसा मैं मानता हूँ। आपका स्वागत है। आपके मनमें कौन-सी उत्तम कामना है, जिसको मैं हर्षके साथ पूर्ण करूँ? ५०—५२॥