1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 18 / Shloka 46 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 18
Shloka 46

Balkand

77 Sarga
59 Shloka
1/18/46
1-Balkand / Sarga 18 Shloka 46
Shloka
कुशलं कौशिको राज्ञः पर्यपृच्छत् सुधार्मिकः ।
अपि ते संनताः सर्वे सामन्तरिपवो जिताः ॥१-१८-४६॥

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1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

राजन् आपके राज्यकी सीमाके निकट रहनेवाले शत्रु राजा आपके समक्ष नतमस्तक तो हैं? आपने उनपर विजय तो प्राप्त की है न? आपके यज्ञयाग आदि देवकर्म और अतिथि-सत्कार आदि मनुष्यकर्म तो अच्छी तरह सम्पन्न होते हैं न?’॥४६॥