1-Balkand / Sarga 18
Shloka 43
Shloka
प्रत्युज्जगाम संहृष्टो ब्रह्माणमिव वासवः ।स दृष्ट्वा ज्वलितं दीप्त्या तापसं संशितव्रतम् ॥१-१८-४३॥
Sarga 18 / Shloka 43 Balkand