1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 18 / Shloka 32 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 18
Shloka 32

Balkand

77 Sarga
59 Shloka
1/18/32
1-Balkand / Sarga 18 Shloka 32
Shloka
अथैनं पृष्ठतोऽभ्येति सधनुः परिपालयन् ।
भरतस्यापि शत्रुघ्नो लक्ष्मणावरजो हि सः ॥१-१८-३२॥

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1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

जब श्रीरामचन्द्रजी घोड़ेपर चढ़कर शिकार खेलनेके लिये जाते, उस समय लक्ष्मण धनुष लेकर उनके शरीरकी रक्षा करते हुए पीछे-पीछे जाते थे। इसी प्रकार लक्ष्मणके छोटे भाई शत्रुघ्न भरतजीको प्राणोंसे भी अधिक प्रिय थे और वे भी भरतजीको सदा प्राणोंसे भी अधिक प्रिय मानते थे॥ ३१-३२॥