1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 18 / Shloka 31 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 18
Shloka 31

Balkand

77 Sarga
59 Shloka
1/18/31
1-Balkand / Sarga 18 Shloka 31
Shloka
मृष्टमन्नमुपानीतमश्नाति न हि तं विना ।
यदा हि हयमारूढो मृगयां याति राघवः ॥१-१८-३१॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

जब श्रीरामचन्द्रजी घोड़ेपर चढ़कर शिकार खेलनेके लिये जाते, उस समय लक्ष्मण धनुष लेकर उनके शरीरकी रक्षा करते हुए पीछे-पीछे जाते थे। इसी प्रकार लक्ष्मणके छोटे भाई शत्रुघ्न भरतजीको प्राणोंसे भी अधिक प्रिय थे और वे भी भरतजीको सदा प्राणोंसे भी अधिक प्रिय मानते थे॥ ३१-३२॥