1-Balkand / Sarga 18
Shloka 31
Shloka
मृष्टमन्नमुपानीतमश्नाति न हि तं विना ।यदा हि हयमारूढो मृगयां याति राघवः ॥१-१८-३१॥
Sarga 18 / Shloka 31 Balkand