1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 18 / Shloka 26 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 18
Shloka 26

Balkand

77 Sarga
59 Shloka
1/18/26
1-Balkand / Sarga 18 Shloka 26
Shloka
सर्वे ज्ञानोपसम्पन्नाः सर्वे समुदिता गुणैः ।
तेषामपि महातेजा रामः सत्यपराक्रमः ॥१-१८-२६॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

सभी ज्ञानवान् और समस्त सद्गुणोंसे सम्पन्न थे। उनमें भी सत्यपराक्रमी श्रीरामचन्द्रजी सबसे अधिक तेजस्वी और सब लोगोंके विशेष प्रिय थे। वे निष्कलङ्क चन्द्रमाके समान शोभा पाते थे। उन्होंने हाथीके कंधे और घोड़ेकी पीठपर बैठने तथा रथ हाँकनेकी कलामें भी सम्मानपूर्ण स्थान प्राप्त किया था। वे सदा धनुर्वेदका अभ्यास करते और पिताजीकी सेवामें लगे रहते थे॥