1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 18 / Shloka 10 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 18
Shloka 10

Balkand

77 Sarga
59 Shloka
1/18/10
1-Balkand / Sarga 18 Shloka 10
Shloka
प्रोद्यमाने जगन्नाथं सर्वलोकनमस्कृतम् ।
कौसल्याजनयद् रामं दिव्यलक्षणसंयुतम् ॥१-१८-१०॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

यज्ञ-समाप्तिके पश्चात् जब छ: ऋतुएँ बीत गयीं, तब बारहवें मासमें चैत्रके शुक्लपक्षकी नवमी तिथिको पुनर्वसु नक्षत्र एवं कर्क लग्नमें कौसल्यादेवीने दिव्य लक्षणोंसे युक्त, सर्वलोकवन्दित जगदीश्वर श्रीरामको जन्म दिया। उस समय (सूर्य, मंगल, शनि, गुरु और शुक्र—ये) पाँच ग्रह अपने-अपने उच्च स्थानमें विद्यमान थे तथा लग्नमें चन्द्रमाके साथ बृहस्पति विराजमान थे॥