1-Balkand / Sarga 17
Shloka 37
Shloka
तैर्मेघवृन्दाचलकूटसंनिभै-र्महाबलैर्वानरयूथपाधिपैः
बभूव भूर्भीमशरीररूपैः
समावृता रामसहायहेतोः ॥१-१७-३७॥
Sarga 17 / Shloka 37 Balkand