1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 17 / Shloka 37 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 17
Shloka 37

Balkand

77 Sarga
37 Shloka
1/17/37
1-Balkand / Sarga 17 Shloka 37
Shloka
तैर्मेघवृन्दाचलकूटसंनिभै-
र्महाबलैर्वानरयूथपाधिपैः
बभूव भूर्भीमशरीररूपैः
समावृता रामसहायहेतोः ॥१-१७-३७॥

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1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

वे वानरयूथपति मेघसमूह तथा पर्वतशिखरके समान विशालकाय थे। उनका बल महान् था। उनके शरीर और रूप भयंकर थे। भगवान् श्रीरामकी सहायताके लिये प्रकट हुए उन वानर वीरोंसे यह सारी पृथ्वी भर गयी थी॥ ३७॥

Footnote

इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें सत्रहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १७॥