1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 17 / Shloka 32 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 17
Shloka 32

Balkand

77 Sarga
37 Shloka
1/17/32
1-Balkand / Sarga 17 Shloka 32
Shloka
अन्ये नानाविधाञ्छैलान् काननानि च भेजिरे ।
सूर्यपुत्रं च सुग्रीवं शक्रपुत्रं च वालिनम् ॥१-१७-३२॥

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1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

दूसरोंने नाना प्रकारके पर्वतों और जंगलोंका आश्रय लिया। इन्द्रकुमार वाली और सूर्यनन्दन सुग्रीव ये दोनों भाई थे। समस्त वानरयूथपति उन दोनों भाइयोंकी सेवामें उपस्थित रहते थे। इसी प्रकार वे नल-नील, हनुमान् तथा अन्य वानर सरदारोंका आश्रय लेते थे। वे सभी गरुड़के समान बलशाली तथा युद्धकी कलामें निपुण थे। वे वनमें विचरते समय सिंह, व्याघ्र और बड़े-बड़े नाग आदि समस्त वनजन्तुओंको रौंद डालते थे॥