1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 17 / Shloka 24 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 17
Shloka 24

Balkand

77 Sarga
37 Shloka
1/17/24
1-Balkand / Sarga 17 Shloka 24
Shloka
अप्सरस्सु च मुख्यासु तथा विद्याधरीषु च ।
नागकन्यासु च तदा गन्धर्वीणां तनूषु च ।
कामरूपबलोपेता यथाकामविचारिणः ॥१-१७-२४॥

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Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

मुख्य-मुख्य अप्सराओं, विद्याधरियों, नागकन्याओं तथा गन्धर्व-पत्नियोंके गर्भसे भी इच्छानुसार रूप और बलसे युक्त तथा स्वेच्छानुसार सर्वत्र विचरण करनेमें समर्थ वानरपुत्र उत्पन्न हुए॥ २४॥