1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 17 / Shloka 21 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 17
Shloka 21

Balkand

77 Sarga
37 Shloka
1/17/21
1-Balkand / Sarga 17 Shloka 21
Shloka
ऋक्षीषु च तथा जाता वानराः किन्नरीषु च ।
देवा महर्षिगन्धर्वास्तार्क्ष्ययक्षा यशस्विनः ॥१-१७-२१॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

कुछ वानर रीछ जातिकी माताओंसे तथा कुछ किन्नरियोंसे उत्पन्न हुए। देवता, महर्षि, गन्धर्व, गरुड़, यशस्वी यक्ष, नाग, किम्पुरुष, सिद्ध, विद्याधर तथा सर्प जातिके बहुसंख्यक व्यक्तियोंने अत्यन्त हर्षमें भरकर सहस्रों पुत्र उत्पन्न किये॥ २१-२२॥