1-Balkand

Shrimadvalmikiya Ramayan

Sarga 17 / Shloka 20 Balkand

Kand 1-Balkand
Sarga 17
Shloka 20

Balkand

77 Sarga
37 Shloka
1/17/20
1-Balkand / Sarga 17 Shloka 20
Shloka
अजायत समं तेन तस्य तस्य पृथक् पृथक् ।
गोलाङ्गूलीषु चोत्पन्नाः किंचिदुन्नतविक्रमाः ॥१-१७-२०॥

Bhashya Content For This Shloka

1 Bhashyas
Shrimadvalmikiya Ramayan (Gitapress) - हिन्दी
Meaning

रीछ, वानर तथा गोलांगूल (लंगूर) जातिके वीर शीघ्र ही उत्पन्न हो गये। जिस देवताका जैसा रूप, वेष और पराक्रम था, उससे उसीके समान पृथक्-पृथक् पुत्र उत्पन्न हुआ। लंगूरोंमें जो देवता उत्पन्न हुए, वे देवावस्थाकी अपेक्षा भी कुछ अधिक पराक्रमी थे॥ १९-२०॥