1-Balkand / Sarga 17
Shloka 10
Shloka
वानरेन्द्रं महेन्द्राभमिन्द्रो वालिनमात्मजम् ।सुग्रीवं जनयामास तपनस्तपतां वरः ॥१-१७-१०॥
Sarga 17 / Shloka 10 Balkand