1-Balkand / Sarga 16
Shloka 3
Shloka
एवमुक्ताः सुराः सर्वे प्रत्यूचुर्विष्णुमव्ययम् ।मानुषं रूपमास्थाय रावणं जहि संयुगे ॥१-१६-३॥
Sarga 16 / Shloka 3 Balkand